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Best Patriotic poem-मैं नेता हूँ

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                    मैं नेता हूँ                     *********     मैं नेता हूँ, मेरा क्या मैं देश बेच के खाता हूँ। आत्मा मैंने बेच दिया जनता का भाग्य विधाता हूँ।   लाल किसी के घर पैदा हो दावत खाने जाता हूँ।  लाली कोई जनम जो ले ले उसको मैं मरवाता हूँ।   मंच थाम के जनता में ,बेटी बचाओ चिल्लाता हूँ।      मैं नेता हूँ, मेरा क्या मैं देश बेच के खाता हूँ।    गाँव का छोरा पढ़ने चला सीधी भर्ती करवाता हूँ।   पार्टी का उसे मंत्र पढ़ाकर बरसों वोट मैं पाता हूँ।  स्कूल ,कॉलेज, सड़के बनवाता, खूब कमीशन खाता हूँ।  लच्छेदार मैं भाषण देता, जनता को खूब बनाता हूँ।       मैं नेता हूँ, मेरा क्या मैं देश बेचकर खाता हूँ।   शैल तुङबाता, वन कटबाता भव्य मैं महल सजाता हूँ।    अपने बच्चों के खातिर, बेधर्म भी मेल कराता हूँ।    दूजा जो बेधर्म बियाहे, आपस में लाड़बाता हूँ।   ...