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हमारी कलम

जिस दिन हमारी कलम एक अंगार लेकर आयेगी उस दिन समझना देश मैं एक ज्वार लेकर आयेगी कलम ढोती हैं समर और शांति मय संसार भी रनभेरियो का रूद्र इसमें बाँसुरी का प्यार भी कलम जब अंगार लिखती भेद देते मन को हैं शब्द मे वो प्यार हैं जो त्याग दे जीवन को हैं हृदय सब का बदलेगा और सब रहे खुशहाली से कलंक से भयभीत होकर सब डरें महाकाली से चंद्रगुप्त, राणा के वंशज में जगे स्वाभिमान भी और कुछ बढ़कर संभाले क्रांति का कमान भी हर युवा इस देश का बजरंगी ये तो जानेगा गुप्त हैं जो शक्ति इनमें खुद को ये पहचानेगा मैं बनु जावन्त आकर शक्ति का उन्हें बोध दु या बनु मैं सिंधु आकर धर्य का रुख मोड़ दु स्वर्णिम बनेगा देश ये खुद पर मुझे विश्वास है हम कलम के वीर हैं लोगों की जगती आश हैं हम कलम के जरिये पथ साकार लेकर आयेंगे किससे कैसे लड़ना हर हथियार लेकर आयेंगे जानता हूँ राहे मुश्किल लेकिन मे न हारूँगा देश के मीरजाफरो को पहले सबसे मारूँगा हर आदमी खुशहाल हो बाजार लेकर आयेंगे   स्वदेशी और देश मै सहकार लेकर आयेंगे अंग्रेजियत का नाश कर,भारत पुनःबनबायेगे    मैं रहु या ना रहु कुछ नेक करते जायेंग  हैं कठिन ये कार्...

Poem of love-प्रिये

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                   प्रिये                           ****** कल गौधूलि की बेला में, नैना ऐसे हुए चार प्रिये। मूकदर्शक घंटों बैठा, फिर आया एक विचार प्रिये। सुंदरता की तुम मूरत बनो,और मैं तेरा श्रृंगार प्रिये। मैं पर्ण कुटीर का सेवक था, घर मे था एक ही द्वार प्रिये। तेरे पग घर पे पड़ते ही, हर और लग गया सार प्रिये। तरनी मैं अब तक तनहा था, तू बनी मेरी पतवार प्रिये। दिनचर्या मेरी निखर गई, जैसे बिंदिया लिलार प्रिये। जीवन मेरा सुखमय हो गया, ऐसी बही बयार प्रिये। बैरागी मैं बनता तो ,होती नारी की हार प्रिये। पर तेरा रमणीय हाला पी, इतना हो गया लाचार प्रिये। रोम-रोम पुलकित हो गाये, हर नव्ज़ में हैं झंकार प्रिये। आपादमस्तक हम मिल जाये, अब रहे न कोई दरार प्रिये। एक दूजे में खो जाए, ऐसा अपना संसार प्रिये। हर जनम में दोनों मिलते रहे,एक दूजे को एतवार प्रिये। अपना ऐसा मिलन हुआ, हैं दाता का  उपहार  प्रिये। ...