Poem of love:-मसला
मसला ^^^^^^^ साला को नालायक कहने का,मसला ने ऑग लगाया था। पूस की ठंढ़ी रातों में बीबी ने देर से खाया था। तन्हाई में सोना तय हुआ,नोंक झोंक कर आया था। त्रियमा तक जगा रहा, सर्दी ने सितम वो ढाया था। करबट बदले चादर में सिकुड़े, पाँव नही गरमाया था। जाने कैसा वक़्त फिरा, बीबी से जा टकराया था। मति मेरी मारी गई,पानी में आग लगाया था। भगवान राम की याद आई,माता ने मृग मंगाया था। महाभारत में पांचाली ने,कौरव का नाश कराया था। हम मानव की क्या बिसात, देवों ने शीश झुकाया था। सर्दी ने मुझको हिला दिया,घर बैठे...