Posts

Showing posts with the label प्यास

Best emotional poem-जीर्ण शरीर की आश

Image
        जीर्ण शरीर की आश तु मेरा विश्वास रे बेटा,जीर्ण शरीर की आश रे बेटा। तेरे खातिर हमनें अपना,बदल दिया इतिहास रे बेटा। जब तुम थे नन्हा सा फरिशता ,तब से अपना खून का रिश्ता । अंगुली पकड़ चलना सिखलाय,तोतली को में शुद्ध कराया । मम्मी की फटकार पड़ी तो,आते थे मेरे पास रे बेटा। तु मेरा विश्वास रे बेटा,जीर्ण शरीर की आश रे बेटा। घोड़ा बनकर सैर कराता,बिल्ली बनकर तुझे रिझाता। तुझे हसॉने के खातिर,बनता अपना उपहास रे बेटा। तु मेरा विश्वास हैं बेटा,जीर्ण शरीर की आश है बेटा। तुम मेले में लेटा करते,खिलोनों की जिद किया करते, तेरी हर ख्वाइस के आगे,हो जाता उदास रे बेटा। तु मेरा विश्वास रे बेटा,जीर्ण शरीर की आश रे बेटा। अपने बसन का छेद छुपाया,मैं स्कूल का शुल्क चुकाया। तुम्हे जीवन में आगे बढ़ाया,बड़ी उम्मीद से तुझे पढ़ाया, मेरी इस आशा को अब तुम,मत करना निराश रे बेटा, तु मेरा विश्वास रे बेटा,जीर्ण शरीर की आश रे बेटा। जिंदगी के इस रंगमंच पे,हमने तुमको खुद से सिंचा, तभी तो अब में तुमको समझु,अपना तु है खास रे बेटा। तेरे ज्वर में कई दिनों तक,लेता...