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Best hindi poem:-शायरी संग्रह

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1*  फूलों पे शबनम क्या गिरी, माली ने उसको धो दिये।       जम्हूरियत के सरदारों ने उनको पकडकर धो दिये।        रोटी की ख्वाईश में जो घर से निकल कर आये थे,        जाति, धरम की नीति ने, नफरत के बीज बो दिये।                                                 अनिल कुमार मंडल                                     लोको पायलट/ग़ाज़ियाबाद 2*भारत में चंद घरानों ने, जनतंत्र को ही झकझोर दिया,  दिल्ली पे बिजली क्या गिरी, आदिल ने चहकना छोङ दिया।                                              अनिल कुमार मंडल                         ...

Best emotional poem-जीर्ण शरीर की आश

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        जीर्ण शरीर की आश तु मेरा विश्वास रे बेटा,जीर्ण शरीर की आश रे बेटा। तेरे खातिर हमनें अपना,बदल दिया इतिहास रे बेटा। जब तुम थे नन्हा सा फरिशता ,तब से अपना खून का रिश्ता । अंगुली पकड़ चलना सिखलाय,तोतली को में शुद्ध कराया । मम्मी की फटकार पड़ी तो,आते थे मेरे पास रे बेटा। तु मेरा विश्वास रे बेटा,जीर्ण शरीर की आश रे बेटा। घोड़ा बनकर सैर कराता,बिल्ली बनकर तुझे रिझाता। तुझे हसॉने के खातिर,बनता अपना उपहास रे बेटा। तु मेरा विश्वास हैं बेटा,जीर्ण शरीर की आश है बेटा। तुम मेले में लेटा करते,खिलोनों की जिद किया करते, तेरी हर ख्वाइस के आगे,हो जाता उदास रे बेटा। तु मेरा विश्वास रे बेटा,जीर्ण शरीर की आश रे बेटा। अपने बसन का छेद छुपाया,मैं स्कूल का शुल्क चुकाया। तुम्हे जीवन में आगे बढ़ाया,बड़ी उम्मीद से तुझे पढ़ाया, मेरी इस आशा को अब तुम,मत करना निराश रे बेटा, तु मेरा विश्वास रे बेटा,जीर्ण शरीर की आश रे बेटा। जिंदगी के इस रंगमंच पे,हमने तुमको खुद से सिंचा, तभी तो अब में तुमको समझु,अपना तु है खास रे बेटा। तेरे ज्वर में कई दिनों तक,लेता...