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देख तेरे संसार की हालत

  देख तेरे संसार की हालत, क्या हो गई भगवान। कितना बदल गया युवान,२ भूख न बदली,प्यास न बदला, बदल गया जलपान, कितना बदल गया युवान २ पिज़्ज़ा,बर्गर,ठंढा पेय पी, बेच रहा ईमान। कितना बदल गया युवान २ अंग्रेज गया न गई अंग्रेजी, खाना सिखा गये काट कलेजी। कही मोबाइल हैं,कही पे टी वी, लड़ना सिख गई हर बीबी। आज बेटी से बाप दुःखी, करते जो कन्यादान। कितना बदल गया युवान,२ पापा की ये परियां देखो, पहन रही हथकरिया देखो। हाथ में पोवा लेकर डोले, अंग्रेजी में गाली बोले। लोक,लाज सब छोड़ चुकी, पापा इनसे परेशान कितना बदल गया युवान २ लड़के से भी दुःखी हैं पापा, घर में पड़े पुलिसिया छापा, देश धर्म की बात न करते, आय्याशी के गर्त में पड़ते ड्रग्स और कोकीन ये लेकर, बाँटते सबको ज्ञान कितना बदल गया युवान २

हमारी कलम

जिस दिन हमारी कलम एक अंगार लेकर आयेगी उस दिन समझना देश मैं एक ज्वार लेकर आयेगी कलम ढोती हैं समर और शांति मय संसार भी रनभेरियो का रूद्र इसमें बाँसुरी का प्यार भी कलम जब अंगार लिखती भेद देते मन को हैं शब्द मे वो प्यार हैं जो त्याग दे जीवन को हैं हृदय सब का बदलेगा और सब रहे खुशहाली से कलंक से भयभीत होकर सब डरें महाकाली से चंद्रगुप्त, राणा के वंशज में जगे स्वाभिमान भी और कुछ बढ़कर संभाले क्रांति का कमान भी हर युवा इस देश का बजरंगी ये तो जानेगा गुप्त हैं जो शक्ति इनमें खुद को ये पहचानेगा मैं बनु जावन्त आकर शक्ति का उन्हें बोध दु या बनु मैं सिंधु आकर धर्य का रुख मोड़ दु स्वर्णिम बनेगा देश ये खुद पर मुझे विश्वास है हम कलम के वीर हैं लोगों की जगती आश हैं हम कलम के जरिये पथ साकार लेकर आयेंगे किससे कैसे लड़ना हर हथियार लेकर आयेंगे जानता हूँ राहे मुश्किल लेकिन मे न हारूँगा देश के मीरजाफरो को पहले सबसे मारूँगा हर आदमी खुशहाल हो बाजार लेकर आयेंगे   स्वदेशी और देश मै सहकार लेकर आयेंगे अंग्रेजियत का नाश कर,भारत पुनःबनबायेगे    मैं रहु या ना रहु कुछ नेक करते जायेंग  हैं कठिन ये कार्...

Best hindi poem:-कोरोना एक चेतावनी

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कोरोना एक चेतावनी    प्रकृति के एक वार से, देखो विचलित हैं संसार। पंचतत्व से बना ये तन है ,जिनका तो कर लो सत्कार। जंगल काटे, पर्वत तोड़ी, जीव-जन्तु का किया संहार।  अहंकार में ऐसे डूबे,  पंचतत्व का निर्मित सार। पंचभूत को मैला करते,  खुद को कहते तारणहार।    प्रकृति के एक वार से,  देखो विचलित हैं संसार। जीव-जन्तु जब काट रहे थे,  उसने भी की थी चीत्कार। याद करो तुम उनकी तङप को  क्या तुम उतना तड़पे यार। तन मन तेरा जिनसे फलित हैं,  क्या तुम मानते हो उपकार। जीते जी तेरी सेवा की,  मर कर के भी दिया हैं प्यार।    प्रकृति के एक वार से  देखो विचलित हैं संसार। जन्म से लेकर हरेक कर्म में ,मान लो तुम उनका उपकार। कोरोना हैं एक चेतावनी,  प्रकृति से अब तो मान लो हार। उनका जो एहसान मान लो ,जन्म के फेरे उतरो पार। जीव हत्या जो रोक दे मानव,  मानवता हो जय जय कार।   प्रकृति के एक वार से , देखो विचलित हैं संसार।               ...

Best Patriotic poem -दिल्ली

        दिल्ली मीर जाफर राजा बन बैठा,     आजादी के बाद में। जयचंदो ने फौज खड़ी की,     दिल्ली के दरबार में।   देश हमारा खूब लूटाथा,     हिन्दी चीनी प्यार में।     धंधे सारे चला रहे थे,                                                            अपने  ही परिवार में।    मीर जाफर राजा बन बैठा,     आजादी के बाद में।   जयचंदो ने फौज खड़ी की,     दिल्ली के दरबार में।   दो लोगों ने मौज किये है,       पूरे इस संसार में।  बाबाओं की धोती बिकती,      धर्म के बाजार में,  नेताओं के छिक हैं मिलते,      रोज नये अखबार में।   मीर जाफ...