Best emotional poem-मेरी माँ
मेरी माँ ********* सफलता की सीढ़ी चढ़ाती हैं माँ, मुझे हर दुखों से बचाती हैं माँ। जब सूक्ष्म था मैं उनके उदर में, अपना रक्त पिलाती थी माँ। सफलता की सीढ़ी चढ़ाती हैं माँ, मुझे हर दुखों से बचाती हैं माँ। नन्हा सा था मैं जब इनमें समाया, मेरी नन्ही हरकत पे थोड़ा शर्मायी, थोड़ा शर्म खा के बापू को बता के, मेरी हरकतोो पेे खिल खिलाती थी माँ। सफलता की सीढ़ी चढ़ाती हैं माँ, मुझे हर दुखों से बचाती हैं माँ। नौ महीने मुझको अपने अंदर बैठाया, मेरे लिए अपना सौंदर्य गवाया, मेरे जैसे बालक को दुनिया मे लाके, मेरे रोने पे भी मुस्कुराई थी माँ, सफलता की सीढ़ी चढ़ाती हैं माँ, मुझे हर दुखों से बचाती हैं माँ। ...