Best emotional poem-वाणी
वाणी 💐*****💐 आज तुझे मैं सिखलाता हुँ, सुखमय रहने का वो मन्तर । कौआ -कोयल में होता हैै, केवल वाणी का हीअन्तर। दोनों का रंग काला सुन्दर, जाने किसको क्या मिला वर। कर्कश बोली पाता रहता हैै, हर घड़ी अपमान निरन्तर। तीखी बोली से अच्छा हैै, मुख से निकले मुक भरा स्वर। जैसे चुप-चाप छला करते हैं। प्रातः आकर निशा दिवाकर। रात्री में विचरण करता हो, जैसे शांत विधु निशाचर। आज तुझे मैं सिखलाता हुँ, ...