Best hindi poem-कमेटी भल्ला
कमेटी भल्ला *********** दिन रात पटरी पे घूम-घूम, हर जगह का पानी चुम-चुम सह धूप-स्वेद पत्थर पानी, हो गए हैं,हम कुछ अभिमानी। मौसम की थपेड़ों को सहकर, हम आये हें,कुछ और निखर। जब हिना सहती पत्थर प्रहार, बनती हैं हाथों का श्रृंगार। चालक न सब दिन सोता हैं, हक के लिए क्रोधित होता हैं। दो न्याय कमेटी भल्ला दो, इसमें भी कोई दल्ला हो, इतना तो दो न हल्ला हो। हम वही सुखी से खाएंगे, सुरक्षित रेल चलाएगें। रेलवे हमको ये दे ना रही, आशीष हमारी ले ना रही। तो लो मैंने भी छोड़ दिया , अपने हठ से मुख मोड़ लिया। अब याचना नहीं निर्णय होगा, अपने हक में ये तय होगा। जब रेल खड़ी हो जायेगी हर बाधा दुर भगाएगी। यात्री करेंगे ,चीख-पुकार, रेलवे हो जिसका जिम्मेदार। Rac 80 का किलोमीटर होगा, इसमें न कोई चीटर होगा। जो देगा होगा भाई ज्येष्ठ, हम माने उसको परम श्रेष्ठ। हुम् गीत खुशी के गाएंगे, तन मन से रेल चलाएंगे। अनिल कुमार मंडल ...