Best hindi poem-मयखाना
मयखाना महीनों भर हम रहे हैं प्यासे, मिला नहीं मय का प्याला। इतने दिनों में हमनें जाना, बिन मय हम जीनेवाला। अब जब हमनें रिश्ता तोड़ा, मय से और मयखाने से। फिर से सामने सजधज आ गई। नये रूप में मधुशाला। कफन बांध के साकी निकला, लंबी लोगों की माला। बूंद-बूंद से मरे कोरोना, एक ही रट जपनेवाला। सड़क थी खाली, सूूनी गलियों काम धंधे सब बंद पड़े। बाजारों में लाई रौनक, एक अकेली ...